27 अप्रैल को केओंझार के मलिपोसी शाखा में यह घटना हुई। जीतू मुंडा नाम के व्यक्ति ने अपनी मृत बहन की हड्डियां बैंक के बाहर रखीं। वह 20 हजार रुपये निकालना चाहता था, लेकिन बैंक ने “फिजिकल प्रेजेंस” मांगी। कई बार बैंक जाने के बावजूद उसे मदद नहीं मिली। मजबूरी में उसने यह कदम उठाया, जिससे मामला सुर्खियों में आ गया।पटनायक ने इस घटना को अमानवीय और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि नियम लोगों को सशक्त बनाने के लिए होते हैं, अपमान करने के लिए नहीं। बैंक द्वारा आरबीआई नियमों का हवाला देने को उन्होंने गलत बताया।उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के साथ विश्वासघात है।उन्होंने केंद्र से तुरंत कार्रवाई की मांग की।बैंक अधिकारियों पर संवेदनहीन व्यवहार का आरोप लगा।जरूरतमंद व्यक्ति को सही जानकारी और सहायता नहीं दी गई।नियमों के नाम पर इंसानियत को नजरअंदाज किया गया।यह घटना ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।खासकर आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में सेवा पर चिंता बढ़ी है।दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग। ग्रामीण बैंकों में मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील। नियमों को सरल और नागरिक हित में बनाने पर जोर। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने की मांग। बैंकिंग सिस्टम में सुधार की जरूरत बताई गई।ओडिशा में इस घटना को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। मामला राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। यह घटना सिस्टम में सुधार की जरूरत को दिखाती है। अब केंद्र सरकार के कदम पर सबकी नजर टिकी है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें