आज का शब्द: मर्कट और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- तुम भी देते हो तोल तोल ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मर्कट, जिसका अर्थ है- बंदर, बंदर, बानर, मकड़ा। प्रस्तुत है माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- तुम भी देते हो तोल तोल तुम भी देते हो तोल-तोल! नभ से बजली की वह पछाड़, फिर बूँदें बनना गोल-गोल, नभ-पति की भारी चकाचौंध, उस पर बूँदों का मोल-तोल, बूँदों में विधि के मिला बोल। तुम भी देते हो तोल-तोल! भू पर हरितीमा का उभार, उस पर किसान की काट-छाँट, हिरनों की उसमें रेल-पेल, मर्कट-दल की कविता-कुलाँट, बादल, छवि देते ढोल-ढोल। तुम भी देते हो तोल-तोल! टहनी बाहों-सी झूली हो, हो हवा, किन्तु पथ-भूली हो, चिडियाँ पंखों से झलती हों, आँधियाँ कठोर मचलती हों, मीठे में कड़ुवा घोल-घोल। तुम भी देते हो तोल-तोल! हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 7 घंटे पहले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: मर्कट और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- तुम भी देते हो तोल तोल
आज का शब्द: मर्कट और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- तुम भी देते हो तोल तोल 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मर्कट, जिसका अर्थ है- बंदर, बंदर, बानर, मकड़ा। प्रस्तुत है माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- तुम भी देते हो तोल तोल तुम भी देते हो तोल-तोल! नभ से बजली की वह पछाड़, फिर बूँदें बनना गोल-गोल, नभ-पति की भारी चकाचौंध, उस पर बूँदों का मोल-तोल, बूँदों में विधि के मिला बोल। तुम भी देते हो तोल-तोल! भू पर हरितीमा का उभार, उस पर किसान की काट-छाँट, हिरनों की उसमें रेल-पेल, मर्कट-दल की कविता-कुलाँट