मुख्य न्यायाधीश जितेंद्र जैन की पीठ ने कहा कि ऐसे मामले, जिनमें पक्षकार अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर अहंकार की लड़ाई लड़ते हैं, न्याय प्रणाली को जाम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इससे अदालतें उन मामलों को प्राथमिकता नहीं दे पातीं, जिन्हें तत्काल सुनवाई की जरूरत होती है।यह मानहानि का मुकदमा 2017 में एक बुजुर्ग महिला, तारिणिबहन देसाई द्वारा एक अन्य वरिष्ठ नागरिक किल्किलराज भंसाली के खिलाफ दायर किया गया था। अदालत ने पहले भी ऐसे मौके आए थे, जब उसने सुझाव दिया था कि अगर दोनों पक्ष बिना शर्त माफी मांग लें तो मामले का समाधान हो सकता है।हालांकि, करीब 90 वर्षीय तारिणिबहन देसाई ने मानहानि का मुकदमा जारी रखने पर जोर दिया। इससे नाराज होकर अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि इस मामले की सुनवाई 2046 के बाद ही होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के वरिष्ठ नागरिक या अति वरिष्ठ नागरिक होने के आधार पर इसे प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।न्यायाधीश जितेंद्र जैन ने कहा, “मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता, सिवाय इसके कि इस मामले को अगले 20 वर्षों तक नहीं सुना जाना चाहिए। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई 2046 से पहले नहीं की जाएगी।” …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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