आज का शब्द: भूधर और रमेश रंजक की कविता- पर्वत पर चढ़ कर ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- भूधर, जिसका अर्थ है- पहाड़, पर्वत। प्रस्तुत है रमेश रंजक की कविता- पर्वत पर चढ़ कर पर्वत पर चढ़कर इतराने वाले भी कहते हैं पर्वत चुप रहते हैं । कोई सड़क, सुरंग बनाए कोई पूजे या गरियाए लेकिन पौरुष का प्रस्तावन क्षुद्र प्रहारक जान न पाए ऐसे दुख-सुख सहज भाव से पर्वत ही सहते हैं… पर्वत चुप रहते हैं । रीझे गगन-गन्ध के ऊपर इसीलिए कहलाए भूधर बादल का दल, गल जाता है जिसके रजत शिखर को छूकर अपनी ऊँचाई से ऊँचे सत्यमेव जयते हैं… पर्वत चुप रहते हैं । हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 6 hours ago …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: भूधर और रमेश रंजक की कविता- पर्वत पर चढ़ कर
आज का शब्द: भूधर और रमेश रंजक की कविता- पर्वत पर चढ़ कर 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- भूधर, जिसका अर्थ है- पहाड़, पर्वत। प्रस्तुत है रमेश रंजक की कविता- पर्वत पर चढ़ कर पर्वत पर चढ़कर इतराने वाले भी कहते हैं पर्वत चुप रहते हैं । कोई सड़क, सुरंग बनाए कोई पूजे या गरियाए लेकिन पौरुष का प्रस्तावन क्षुद्र प्रहारक जान न पाए ऐसे दुख-सुख सहज भाव से पर्वत ही सहते हैं... पर्वत चुप रहते हैं । रीझे गगन-गन्ध के ऊपर इसीलिए कहलाए भूधर बादल का दल, गल जाता है जिसके रजत शिखर को छूकर अपनी ऊँचाई से