पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा, “पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।” वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न होने के बाद खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ाई जाएंगी।यह बयान उन अटकलों को शांत करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके कारण आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों में ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, आसन्न मूल्य वृद्धि की अफवाहों के कारण आंध्र प्रदेश के कई शहरों में रविवार को 400 से अधिक पेट्रोल पंप सूख गए थे और कुछ आउटलेट्स पर मांग में 30-33 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई थी।शर्मा ने कहा, “हमने कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग देखी है। हम इन सभी जगहों पर राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में हैं। सभी खुदरा आउटलेट्स की निगरानी की जा रही है और आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित हो और कोई कमी न हो।” उन्होंने जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने का आग्रह किया।उल्लेखनीय है कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड चौथे वर्ष से अपरिवर्तित बनी हुई हैं। कीमतें अप्रैल 2022 की शुरुआत से स्थिर हैं। इनपुट लागत और पंप की कीमतों के बीच बढ़ते अंतर के कारण सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, इन कंपनियों को रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।विश्लेषकों ने पहले बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की लागत के कारण चुनावों के बाद 25-28 रुपये प्रति लीटर की मूल्य वृद्धि की संभावना …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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