साल 2011 में जब ममता पहली बार सत्ता के शिखर पर बैठी थीं, तब उनकी कुल जमा पूंजी एक सूती साड़ी और दुर्गा सप्तशती का पाठ भर थी। आज भी वह वहीं रहती हैं, लेकिन अब इस सादगी के किले के चारों ओर विरोधाभासों की दीवारें खड़ी हो गई हैं। चर्चा ममता बुआ के पुराने घर की भी है और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की डायमंड हार्बर वाली उस बड़ी छावनीनुमा हवेली की भी। यह हवेली अब विपक्ष के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है।ममता और भवानीपुर का रिश्ता महज विधायक और क्षेत्र का नहीं है। यह सीट ममता को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने वाला लांचिंग पैड और फिर उनका सबसे मजबूत गढ़ रही है। वह यहां से दो बार, साल 2011 के उपचुनाव और फिर 2016 के आम चुनाव में विधायक रह चुकी हैं। 2021 में उन्होंने उपचुनाव जीतकर तीसरी बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट, जिसमें भवानीपुर विधानसभा आती है, वहां से छह बार सांसद रह चुकी हैं। यानी, इस मिट्टी के कण-कण से उनका पुराना नाता है।ममता की ताकत उनका लोगों से जुड़ाव है, लेकिन शुभेंदु ठोस गणित के साथ मैदान में हैं। साल 2021 के उपचुनाव में ममता ने यहां 58,832 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल की बढ़त सिमटकर महज 3,492 वोट रह गई। इसके बाद मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में यहां 60 हजार से अधिक वोट काट दिए गए।कुल मतदाता संख्या 2,05,553 से घटकर अब केवल 1,60,313 रह गई है। ममता ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे साजिश बताया है और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। वहीं, शुभेंदु इसी अंकगणित के दम पर ममता को 20 हजार वोटों से हराने की हुंकार भर रहे हैं।साल 2021 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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