मणिपुर की अखंडता के लिए काम करने वाली सीओसीओएमआई के आह्वान पर हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। ये प्रदर्शनकारी शहर के विभिन्न हिस्सों से चार अलग-अलग रैलियों के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि, पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने पहले ही बाबूपाड़ा स्थित मुख्यमंत्री आवास के चारों ओर सुरक्षा का कड़ा पहरा लगा रखा था।केसामपत जंक्शन, कांगला गेट, कोनुंग ममांग और मोइरांगखोंग जैसे प्रमुख स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, जब भीड़ ने इंफाल पूर्वी जिले के खुरई लामलोंग इलाके में बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। यह इलाका मुख्यमंत्री आवास से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।प्रदर्शन में शामिल लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे। उनकी प्रमुख मांगों में बिष्णुपुर जिले में हाल ही में हुए बम विस्फोट में मारे गए दो मासूम बच्चों के लिए न्याय की मांग शामिल थी। इसके अलावा, आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि जातीय संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हजारों लोगों का तत्काल पुनर्वास किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि 3 मई, 2023 से शुरू हुए संकट के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।काफी हंगामे और झड़पों के बाद आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से मिलने की अनुमति दी गई। मुलाकात के बाद सीओसीओएमआई के संयोजक वाई के धीरेन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप दिया है। धीरेन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और अलग-अलग नैरेटिव के कारण शांति प्रयासों में बाधा आ रही है। उन्होंने च …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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