इस मुलाकात को लेकर ईरान ने अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने स्पष्ट किया है कि अराघची के पाकिस्तान दौरे का परमाणु वार्ता से कोई लेना-देना नहीं है। खुद अराघची ने भी बताया है कि उनकी इस यात्रा का मुख्य मकसद द्विपक्षीय मामलों पर अपने सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाना और क्षेत्रीय विकास पर चर्चा करना है। पाकिस्तान के बाद वह ओमान और रूस की यात्रा पर भी जाएंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के वार्ताकारों के साथ सीधे तौर पर कोई भी बैठक तय नहीं है।ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करेगा। अज़ीज़ी ने जोर देकर कहा कि यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि परमाणु गतिविधियों के बारे में कोई भी बातचीत ईरान के लिए एक ‘रेड लाइन’ यानी सख्त मनाही है। दूसरी ओर, अमेरिका लगातार यह मांग कर रहा है कि युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी शांति समझौते के तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम हर हाल में रोकना होगा।भले ही ईरान ने अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है, लेकिन व्हाइट हाउस ने एक बड़ा खुलासा किया है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी ईरान वार्ता के लिए शनिवार को पाकिस्तान जा रहे हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जिन्होंने बातचीत के पहले दौर का नेतृत्व किया था, वह भी इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के लिए स्टैंडबाय (तैयार) पर हैं।इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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