हालांकि पहले चरण में बड़ा बदलाव यह दिखा कि पिछले चुनावों की तरह इस बार भाजपा के बूथ टेबल खाली नहीं रहे। अब मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि नैरेटिव और जमीनी पकड़ का हो गया है। दोनों ही दलों ने पहले चरण के बाद रणनीति की दिशा बदल दी है। नैरेटिव में बढ़त बनाने वाली भाजपा की कोशिश अगले चरण की 142 सीटों पर बूथ प्रबंधन की खामियों को दूर कर अभेद्य बनाने की है।हुगली में नाव चलाकर पीएम नरेंद्र मोदी का मुतमईन दिखना, इसी हवा को चक्रवात में बदलने का टोटका है। दूसरी ओर, बूथों पर मजबूत पकड़ रखने वाली तृणमूल बचाव की मुद्रा से बाहर आकर भाजपा के नैरेटिव को काउंटर करने में पूरी ऊर्जा लगा रही है। खुद ममता ने कमान संभालते हुए शाह और भाजपा पर प्रहार तेज कर जमीन पर अपना नैरेटिव भेजने की कोशिश में जुट गई है।पहले चरण में करीब 93% मतदान दर्ज किया गया। 2011 में जब ममता ने वामपंथी किला ढहाया था, तब 84.7% मतदान हुआ था। 2021 में यह आंकड़ा करीब 82% था। इतनी ऊंची वोटिंग को लेकर विश्लेषण दो ध्रुवों में बंटा है। भाजपा सत्ता विरोधी लहर का ज्वार बता रही तो तृणमूल महिला और ग्रामीण वोटरों का सत्ता के पक्ष में समर्थन मान रही है।पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 152 में से 110 सीटें जीतने का बड़ा दावा किया। वहीं, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस आंकड़े को 125 सीटों तक पहुंचा दिया। राजनीतिक विशेषज्ञ इन दावों को हकीकत से ज्यादा काडर का मनोबल ऊंचा रखने का मनोवैज्ञानिक अतिरेक मान रहे हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आक्रामक हैं। उन्होंने इस भारी मतदान को बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ बंगाल की अस्मिता का जवाब और अपनी कल्याणकारी योजनाओं की जीत करार दिया है।दावों …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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