शुक्रवार को खनन मंत्रालय ने इस बड़े फैसले की जानकारी दी। सरकार ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष की सफलताओं को देखते हुए, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना’ (एसएएससीआई) के तहत 5,000 करोड़ रुपये के इस भारी इनाम को शामिल किया गया है। मंत्रालय ने इसके लिए काम करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इस योजना का मुख्य मकसद खदानों का काम तेजी से शुरू करना, राज्यों की कमाई को बढ़ाना और खनन क्षेत्र के पूरे कामकाज और तकनीक को सुधारना है।इस योजना को सरकार ने तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। पहले हिस्से के तहत उन राज्यों को इनाम का पैसा दिया जाएगा जो खनन से जुड़े बड़े और जरूरी सुधारों को पूरा करेंगे। इसमें राज्यों को अपने डेटा को ‘राष्ट्रीय खनन पोर्टल’ के साथ पूरी तरह से जोड़ना होगा। इसके अलावा, राज्यों को हर साल खदानों की नीलामी का एक पूरा सालाना कैलेंडर भी प्रकाशित करना होगा ताकि सभी काम समय पर और सही तरीके से हो सकें।योजना के दूसरे हिस्से में सरकार ने नीलामी की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत उन राज्यों को वित्तीय इनाम दिया जाएगा जो बड़े खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी करेंगे। लेकिन इसमें एक बड़ी शर्त यह है कि इन खदानों के लिए जंगल, पर्यावरण और जमीन से जुड़ी सभी जरूरी मंजूरियां (क्लियरेंस) पहले से ही पूरी होनी चाहिए। इससे नीलामी के बाद तुरंत काम शुरू करने में कोई भी रुकावट या देरी नहीं होगी।5,000 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम योजना के तीसरे और आखिरी हिस्से में राज्यों के काम और प्रदर्शन को एक पैमाने के जरिए मापा जाएगा। खनन मंत्रालय ने बताया है कि तीसरे हिस्से के तहत इनाम की रकम सीधे तौर पर ‘स्टेट …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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