राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव दरअसल, आम आदमी पार्टी (आप) में हालिया दिनों में कुछ खटपट की खबरें सामने आई हैं। वजह रहे पार्टी की तरफ से राज्यसभा में उपनेता बनाए गए राघव चड्ढा। दरअसल, आप ने बीते हफ्ते राघव चड्ढा को न सिर्फ राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाने के लिए सचिवालय को चिट्ठी लिखी, बल्कि उनके बोलने के समय को भी कम करने की मांग की। इसी के साथ उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाने का एलान किया गया। राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की कार्रवाई के बाद अपने बचाव में कुछ तर्क जरूर दिए हैं, लेकिन इस बीच उन पर भाजपा के करीब जाने के आरोप भी लगे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आप में राघव चड्ढा का भविष्य धुंधला है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल उठने लगे कि आखिर राघव चड्ढा का पार्टी में क्या भविष्य होगा। आने वाले समय में वे आप में अपनी पहचान प्रमुख नेता के तौर पर कायम रख पाएंगे या बीते 14 साल में जिस तरह एक के बाद एक आप के कई संस्थापक नेताओं को किनारे लगाया गया, वैसा ही कुछ राघव चड्ढा का भी होगा। ये भी पढ़ें: AAP vs Raghav Chadha: खामोशी, सीमित सक्रियता और बदले संकेत, केजरीवाल और राघव के बीच दूरी बढ़ने की पूरी कहानी दरअसल, आम आदमी पार्टी (आप) में हालिया दिनों में कुछ खटपट की खबरें सामने आई हैं। वजह रहे पार्टी की तरफ से राज्यसभा में उपनेता बनाए गए राघव चड्ढा। दरअसल, आप ने बीते हफ्ते राघव चड्ढा को न सिर्फ राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाने के लिए सचिवालय को चिट्ठी लिखी, बल्कि उनके बोलने के समय को भी कम करने की मांग की। इसी के साथ उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाने का एलान किया गया। राघव चड्ढा ने आम आद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आप की टूटती 'झाड़ू': सफाई की सौगंध लेकर शुरू हुई सियासत, अपनों के भ्रष्टाचार के आरोपों से ही बिखरती गई पार्टी
राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव दरअसल, आम आदमी पार्टी (आप) में हालिया दिनों में कुछ खटपट की खबरें सामने आई हैं। वजह रहे पार्टी की तरफ से राज्यसभा में उपनेता बनाए गए राघव चड्ढा। दरअसल, आप ने बीते हफ्ते राघव चड्ढा को न सिर्फ राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाने के लिए सचिवालय को चिट्ठी लिखी, बल्कि उनके बोलने के समय को भी कम करने की मांग की। इसी के साथ उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाने का एलान किया गया। राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की कार्रवाई के बाद अपने बचाव में कुछ तर्क