आज का शब्द: क्षत और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कविता- कौन फिर तुझको बरेगा ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- क्षत, जिसका अर्थ है- घाव, जख्म, जिसे क्षति या आघात पहुँचा हो, घायल। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कविता- कौन फिर तुझको बरेगा कौन फिर तुझको बरेगा तू न जब उस पथ मरेगा? निखिल के शर शत्रु हनकर, क्षत भले कर क्षत्र बनकर, तू चला जबतक न तनकर,– धर्म का ध्वज कर न लेगा। देश के अवशेष के रण शमन के प्रहरण दिया तन तो हुआ तू शरणशारण, विश्व तेरे यश भरेगा। मिलेंगे जन अशंकित मन खिलेंगे निश्शेष-चेतन, विषद-वासों के विभूषण, चरण के तल, तू तरेगा। हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 7 hours ago …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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