आज का शब्द: हिमाद्रि और गोपालप्रसाद व्यास की कविता- नमामि मातु भारती ! ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- हिमाद्रि, जिसका अर्थ है- हिमालय। प्रस्तुत है गोपालप्रसाद व्यास की कविता- नमामि मातु भारती ! नमामि मातु भारती ! हिमाद्रि-तुंग, श्रींगिनी त्रिरंग- अंश- रंगिनी नमामि मातु भारती सहस्र दीप आरती ! समुद्र- पाद- पल्लवे विराट विश्व –वल्लभे प्रबुद्ध बुद्ध की धरा प्रणम्य हे वसुंधरा ! स्वराज्य – स्वावलंबिनी सदैव सत्य – संगिनी अजेय ,श्रेय - मंडिता समाज-शास्त्र-पण्डिता ! अशोक -चक्र –संयुते समुज्ज्वले समुन्नते मनोग्य मुक्ति –मंत्रिणी विशाल लोकतंत्रिनी ! अपार शस्य – सम्पदे अजस्र श्री पड़े-पड़े शुभन्करे - प्रियंवदे दया - क्षमा वंशवदे ! मनस्विनी – तपस्विनी रणस्थली – यशस्विनी कराल- काल- कलिका प्रचंड मुंड- मालिका . अमोघ शक्ति – धारिणी कुराज कष्ट – वारिणी अदैन्य मंत्र – दायिका नमामि राष्ट्र – नायिका ! हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 7 घंटे पहले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: हिमाद्रि और गोपालप्रसाद व्यास की कविता- नमामि मातु भारती !
आज का शब्द: हिमाद्रि और गोपालप्रसाद व्यास की कविता- नमामि मातु भारती ! 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- हिमाद्रि, जिसका अर्थ है- हिमालय। प्रस्तुत है गोपालप्रसाद व्यास की कविता- नमामि मातु भारती ! नमामि मातु भारती ! हिमाद्रि-तुंग, श्रींगिनी त्रिरंग- अंश- रंगिनी नमामि मातु भारती सहस्र दीप आरती ! समुद्र- पाद- पल्लवे विराट विश्व –वल्लभे प्रबुद्ध बुद्ध की धरा प्रणम्य हे वसुंधरा ! स्वराज्य – स्वावलंबिनी सदैव सत्य – संगिनी अजेय ,श्रेय - मंडिता समाज-शास्त्र-पण्डिता ! अशोक -चक्र –संयुते समुज