गेगॉन्ग अपांग ने जेएन कॉलेज, पासीघाट से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1972 से 1975 के बीच कांग्रेस प्रदेश परिषद के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1978 में वे राज्य की पहली विधानसभा के लिए चुने गए और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) व कृषि मंत्री नियुक्त किए गए।18 जनवरी 1980 को गेगॉन्ग अपांग पहली बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उस समय वे मात्र 34 वर्ष के थे और यह पद संभालने वाले सबसे युवा नेताओं में से एक थे। वे 1999 तक लगातार इस पद पर रहे। इसी दौरान 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी. नरसिम्हा राव के साथ चकमा-हजोंग आदिवासियों के निर्वासन के मुद्दे पर मतभेदों के बाद, उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और अरुणाचल कांग्रेस नाम की अपनी क्षेत्रीय पार्टी बना ली। बाद में 1999 में कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।2003 में अपांग को उनकी अरुणाचल कांग्रेस और अन्य दलों के नए गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का नेता चुना गया। इसके कुछ ही महीनों बाद, अगस्त 2003 में गेगॉन्ग अपांग अपने समर्थक विधायकों के साथ औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। अपांग के पार्टी में शामिल होने से 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा विधायकों की कुल संख्या 42 हो गई और इस तरह अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का पहला राज्य बन गया, जहां भाजपा की सरकार बनी। अपांग इस सरकार में भाजपा के मुख्यमंत्री रहे।हालांकि, यह साथ लंबा नहीं चला और 2004 के आम चुनावों में एनडीए गठबंधन की हार के कुछ महीने बाद ही, अपांग वापस कांग्रेस में लौट गए। अक्तूबर 2004 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला और अपांग एक बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
BJP के बाहरी CM: सम्राट चौधरी ही नहीं, इन राज्यों में भी दूसरे दलों से आए चेहरों को भाजपा ने बनाया मुख्यमंत्री
गेगॉन्ग अपांग ने जेएन कॉलेज, पासीघाट से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1972 से 1975 के बीच कांग्रेस प्रदेश परिषद के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1978 में वे राज्य की पहली विधानसभा के लिए चुने गए और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) व कृषि मंत्री नियुक्त किए गए।18 जनवरी 1980 को गेगॉन्ग अपांग पहली बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उस समय वे मात्र 34 वर्ष के थे और यह पद संभालने वाले सबसे युवा नेताओं में से एक थे। वे 1999 तक लगातार इस पद पर रहे। इसी दौरान 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्