170 करोड़ के सोने का दावा साबित नहीं समझौते से पीछे हटने पर सवाल घरेलू हिंसा के आरोप अस्पष्ट कानून के दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणी अनुच्छेद 142 के तहत तलाक मंजूर न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सिर्फ परिवार के सदस्यों के नाम लेकर, बिना उनके किसी प्रत्यक्ष भूमिका के आरोप लगाए, आपराधिक मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। अदालत ने इस मामले को गढ़ा गया बताते हुए कड़ी टिप्पणी की।मामले में महिला ने आरोप लगाया था कि तलाक समझौते के तहत उसे 120 करोड़ रुपये के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्कुट दिए जाने का वादा किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह दावा किसी भी आधिकारिक समझौते या दस्तावेज में दर्ज नहीं था और बाद में शिकायत में जोड़ा गया। अदालत ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद माना।कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मई 2024 में हुए समझौते के तहत 1.5 करोड़ रुपये के निपटान सहित कई वित्तीय और संपत्ति संबंधी प्रावधान तय हुए थे, जिन पर आंशिक अमल भी हो चुका था। इसके बावजूद महिला की ओर से तलाक की दूसरी अर्जी से पीछे हटना और बाद में घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करना उचित नहीं पाया गया।अदालत ने कहा कि शिकायत में हिंसा के ठोस विवरण नहीं थे और आरोप सामान्य व अस्थिर थे। यह भी नोट किया गया कि लंबे वैवाहिक जीवन के दौरान पहले कभी ऐसे आरोप नहीं लगाए गए थे, बल्कि समझौते के बाद अचानक शिकायत दर्ज कराई गई।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में भावनाओं के आधार पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करना न्याय प्रणाली के दुरुपयोग की ओर ले जाता है और इससे अनावश्यक उत्पीड़न होता है।मामले में लंबे समय से अलग रह रहे दंपति के रिश्ते को ‘पूरी तरह टूट चुका’ मानते हुए सु …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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