आज का शब्द: अम्लान और रामधारी सिंह “दिनकर” की कविता- खिली भू पर जब से तुम नारि ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अम्लान, जिसका अर्थ है- निर्मल, स्वच्छ, साफ, जो म्लान न हो। प्रस्तुत है रामधारी सिंह ‘‘दिनकर’’ की कविता- नारी खिली भू पर जब से तुम नारि, कल्पना-सी विधि की अम्लान, रहे फिर तब से अनु-अनु देवि! लुब्ध भिक्षुक-से मेरे गान। तिमिर में ज्योति-कली को देख सुविकसित, वृन्तहीन, अनमोल; हुआ व्याकुल सारा संसार, किया चाहा माया का मोल। हो उठी प्रतिभा सजग, प्रदीप्त, तुम्हारी छवि ने मारा बाण; बोलने लगे स्वप्न निर्जीव , सिहरने लगे सुकवि के प्राण। लगे रचने निज उर को तोड़ तुम्हारी प्रतिमा प्रतिमाकार, नाचने लगी कला चहुँ ओर भाँवरी दे-दे विविध प्रकार। ज्ञानियों ने देखा सब ओर प्रकृति की लीला का विस्तार; सूर्य, शशि, उडु जिनकी नख-ज्योति पुरुष उन चरणों का उपहार। अगम ‘आनन्द’-जलधि में डूब तृषित ‘सत्-चित्’ ने पाई पूर्त्ति; सृष्टि के नाभि-पद्म पर नारि! तुम्हारी मिली मधुर रस-मूर्त्ति। कुशल विधि के मन की नवनीत, एक लघु दिव-सी हो अवतीर्ण, कल्पना-सी, माया-सी, दिव्य विभा-सी भू पर हुई विकीर्ण। दृष्टि तुमने फेरी जिस ओर गई खिल कमल-पंक्ति अम्लान; हिंस्र मानव के कर से स्रस्त शिथिल गिर गए धनुष औ’ बाण। हो गया मदिर दृगों को देख सिंह-विजयी बर्बर लाचार, रूप के एक तन्तु में नारि, गया बँध मत्त गयन्द-कुमार। एक चितवन के शर ने देवि! सिन्धु को बना दिया परिमेय, विजित हो दृग-मद से सुकुमारि! झुका पद-तल पर पुरुष अज्ञेय। कर्मियों ने देखा जब तुम्हें; टूटने लगे शम्भु के चाप। बेधने चला लक्ष्य गांडीव, पुरुष के खिलने लगे प्रताप। हृदय निज फरहादों ने च …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: अम्लान और रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता- खिली भू पर जब से तुम नारि
आज का शब्द: अम्लान और रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता- खिली भू पर जब से तुम नारि 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अम्लान, जिसका अर्थ है- निर्मल, स्वच्छ, साफ, जो म्लान न हो। प्रस्तुत है रामधारी सिंह ''दिनकर'' की कविता- नारी खिली भू पर जब से तुम नारि, कल्पना-सी विधि की अम्लान, रहे फिर तब से अनु-अनु देवि! लुब्ध भिक्षुक-से मेरे गान। तिमिर में ज्योति-कली को देख सुविकसित, वृन्तहीन, अनमोल; हुआ व्याकुल सारा संसार, किया चाहा माया का मोल। हो उठी प्रतिभा सजग, प्रदीप्त, तुम्हारी छवि ने मारा बाण;