1979 में जब ईरान में इस्लामिक क्रांति आई, तब अमेरिका और ईरान के बीच की दोस्ती टूट गई। तब से दोनों देश सीधे बात करने से बचते रहे। 47 बाद दोनों देशों के बीच छह हफ्ते का युद्ध हुआ। फिर संघर्ष विराम की घोषणा हुई। अब अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को बातचीत होगी। यह साफ नहीं है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बातचीत करेंगे या अलग-अलग कमरों में बैठेंगे और पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व दोनों देशों के नेताओं तक संदेश का आदान-प्रदान करने का काम करेगा? विश्व मीडिया के मुताबिक, बुनियादी मतभेद अभी भी वहीं हैं और इस्लामाबाद में शनिवार को कूटनीति का इम्तेहान होना है। इस्लामाबाद में हो क्या हो रहा है? ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल शनिवार को इस्लामाबाद में होंगे। छह हफ्तों के युद्ध के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को पाकिस्तान रवाना हुए। उनके साथ हैं राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, जिन्होंने फरवरी में बातचीत के एक असफल दौर का नेतृत्व किया था। ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद गलीबाफ इस बैठक का नेतृत्व करेंगे। इस बैठक से क्या उम्मीद की जा सकती है? यह 1979 के बाद पहली बार होगा जब अमेरिका और ईरान के अधिकारी इस स्तर पर आमने-सामने बैठेंगे। इस्लामाबाद में तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही हैं। रेड अलर्ट जारी है। 10,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और सभी प्रवेश बिंदु बंद कर दिए गए हैं। सुरक्षा कारणों से प्रतिनिधिमंडलों के आने का कोई कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है। उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बातचीत के लिए पाकिस्तान आने वाले प्रतिनिधियों के लिए वीज …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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