इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान इस समय बहुत बड़ी मुश्किल में है और उसकी असली ताकत युद्ध के मैदान से ज्यादा मीडिया और अपनी बातों को घुमाकर पेश करने में दिख रही है। उनके पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों होर्मुज को रोककर दुनिया पर दबाव बनाने के अलावा कोई बड़ा रास्ता नहीं बचा है। सच्चाई यह है कि उनकी आर्थिक और सैन्य हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब अपनी जान बचाने और देश चलाने के लिए उनके पास समझौते की मेज पर आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।ट्रंप का यह ‘रीसेट’ केवल एक युद्धविराम नहीं है, बल्कि यह ईरान के साथ संबंधों को पूरी तरह से नए सिरे से शुरू करने की कोशिश है। ईरान के साथ सीजफायर होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका पहले ही अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा था कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के आधार के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच पुराने विवादों के अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब इन दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी।ट्रंप का यह ‘रीसेट’ केवल एक युद्धविराम नहीं है, बल्कि यह ईरान के साथ संबंधों को पूरी तरह से नए सिरे से शुरू करने की कोशिश है। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध पर ईरान पर होने वाले ‘विनाशकारी हमले’ को टाल दिया है।ट्रंप ने कहा था कि अगर यह मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो शायद ‘एक पूरी सभ्यता का नामोनिशान मिट जाता’, लेकिन अब, पाकिस्तान की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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