चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान वाली विधानसभा सीटों के लिए नौ अप्रैल को मतदाता सूची को अंतिम रूप देते हुए फ्रीज कर दिया था। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। मतदाता सूची फ्रीज करने का मतलब है कि इस विधानसभा चुनावों के लिए सूची में किसी भी नए व्यक्ति को जोड़ा नहीं जा सकेगा, जिसका नाम हटा दिया गया है।सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष एक वकील ने मतदाता सूची को फ्रीज करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। वकील ने बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कई अपीलें अभी भी लंबित हैं, जबकि चुनाव आयोग ने नौ अप्रैल को ही सूची को फ्रीज कर दिया है।इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम 13 अप्रैल को याचिका पर विचार करेंगे। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने बताया कि सूची फ्रीज करने की अंतिम तिथि नौ अप्रैल थी और उसके बाद किसी भी नए नाम पर विचार नहीं किया जाएगा। नायडू ने यह भी कहा कि वोट देने का अधिकार बना रहेगा और ये याचिकाकर्ता भी वैसे ही हैं, जैसे वे अन्य लोग जिनकी अपीलों को स्वीकार किया गया था। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Supreme Court: मतदाता सूची फ्रीज करने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 13 अप्रैल को सीजेआई की पीठ करेगी सुनवाई
चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान वाली विधानसभा सीटों के लिए नौ अप्रैल को मतदाता सूची को अंतिम रूप देते हुए फ्रीज कर दिया था। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। मतदाता सूची फ्रीज करने का मतलब है कि इस विधानसभा चुनावों के लिए सूची में किसी भी नए व्यक्ति को जोड़ा नहीं जा सकेगा, जिसका नाम हटा दिया गया है।सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष एक वकील ने मतदाता सूची को फ्रीज करने के फैस