सवाल: उठापटक के बीच किन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा एक्शन देखने को मिला? जवाब: संकट के इस दौर में धातु और खनन क्षेत्र सबसे बड़े आउटपरफॉर्मर बनकर उभरे, क्योंकि वैश्विक रसद बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक धातुओं की कीमतें बढ़ गईं। हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे शेयरों में भारी खरीदारी हुई। बैंकिंग क्षेत्र ने भी बाजार को सहारा दिया। मजबूत ऋण वृद्धि की उम्मीदों पर बैंक निफ्टी 8 अप्रैल को 55,703.9 के स्तर तक पहुंच गया था। शुक्रवार को एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक और एसबीआई प्रमुख गेनर रहे। इसके विपरीत आईटी शेयरों में टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसी कंपनियों में मुनाफावसूली हावी रही। वहीं, वैश्विक अनिश्चितता के डर से सोने में सुरक्षित निवेश बढ़ा और 8 अप्रैल को सोना 1,50,448 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो बाद में 1,50,920 रुपये तक हो गया। सवाल: विश्व बैंक और अन्य संस्थानों के अनुमानों में निवेशकों के लिए क्या इशारा है? जवाब: विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और महंगी ऊर्जा के कारण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.6% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। इसके बावजूद, भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल मजबूत हैं और यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली उभरती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जानकारों के मुताबिक, निवेशकों को अब बहुत सावधानी और चयनात्मकता बरतनी चाहिए। बाजार में अभी ऐसे शेयरों की तलाश करें जिनकी बैलेंस शीट मजबूत हो और जो महंगाई व बढ़ी हुई लागत के बावजूद ग्राहकों तक बोझ डालने की क्षमता रखते हों। ग्लोबल टेंशन पूरी तरह खत्म होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए मजबूत घरेलू पूंजी के स …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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