28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए जिस युद्धविराम की घोषणा की गई थी, वह फिलहाल लड़खड़ाता नजर आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत रजा अमीरी मुगाद्दम ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल के आगमन वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी है। यह पोस्ट हटाए जाने के बाद वार्ता के आयोजन पर संशय और सस्पेंस गहरा गया है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।हालांकि, सिर्फ यही कारण नहीं हैं। इससे पहले युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर जोरदार हमले किए। बुधवार का दिन इस युद्ध का सबसे खूनी दिन साबित हुआ। इस्राइली हमले में 250 से अधिक लोग मारे गए। ईरान का दावा है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल था, जबकि इस्राइल और अमेरिका इससे इनकार कर रहे हैं।इसके इतर, दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार के लिए अहम होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार है। लेबनान पर हुए हमले के बाद ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है। ईरानी एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रोके गए तो होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दूसरी ओर ट्रंप ने एक बार फिर से चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो उसे पहले से भी कहीं अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा।खबर है कि पाकिस्तान में होने वाली निर्णायक शांति वार्ता से ठीक पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। दोनों देशों के विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को घटा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
PAK में वार्ता पर संशय के बादल: पहले बैठक वाला सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट किया, अब यूरेनियम पर पेंच फंसा रहा ईरान
28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए जिस युद्धविराम की घोषणा की गई थी, वह फिलहाल लड़खड़ाता नजर आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत रजा अमीरी मुगाद्दम ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल के आगमन वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी है। यह पोस्ट हटाए जाने के बाद वार्ता के आयोजन पर संशय और सस्पेंस गहरा गया है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।हालांकि, सिर्फ यही कारण नहीं हैं। इससे पहले युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद