अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज जलसंधि को खुला रखने पर सहमति दे दी है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम रास्ता है। लेविट ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसे बातचीत के लिए ठोस आधार माना गया है। इससे पहले ईरान ने 10 बिंदुओं का एक प्लान दिया था, लेकिन उसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव इतना कमजोर था कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने उसे कूड़ेदान में फेंक दिया। लेविट के अनुसार अब ईरान ने संशोधित (मॉडिफाइड) प्रस्ताव पेश किया है, जिसे अमेरिका ने बातचीत के लिए स्वीकार कर लिया है। यह नया प्लान अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव के साथ मिलाकर आगे बढ़ाया जाएगा। लेविट ने साफ कहा कि ट्रंप की मुख्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान अपने देश में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप कभी भी ईरान की मनमानी शर्तों को स्वीकार नहीं करेंगे और कोई भी समझौता सिर्फ अमेरिका के हित में ही होगा।व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले दो हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण होंगे। इसी दौरान दोनों देशों के बीच बंद कमरे में गुप्त और जटिल बातचीत होगी। हालांकि, यह बातचीत तभी जारी रहेगी जब होर्मुज पूरी तरह खुला रहेगा और वहां किसी तरह की रुकावट नहीं होगी। लेविट के अनुसार, अब बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद में होगा।इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक विशेष टीम भेजी जा रही है। इस टीम का नेतृत्व खुद जेडी वेंस करेंगे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे। बताया गया है कि इन वा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
अमेरिका-ईरान वार्ता: ट्रंप ने क्यों ठुकराया पुराना प्लान? कैरोलिन लेविट बोलीं- अब नए प्रस्ताव पर होगी बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज जलसंधि को खुला रखने पर सहमति दे दी है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम रास्ता है। लेविट ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसे बातचीत के लिए ठोस आधार माना गया है। इससे पहले ईरान ने 10 बिंदुओं का एक प्लान दिया था, लेकिन उसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव इतना कमजोर था कि डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने उसे कूड़ेद