लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि भारत का डेटा उसके लोगों का है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अर्थव्यवस्था में यह सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है - आई बनाने, कंपनियों को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए।राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, “इसलिए मैंने सरकार से अमेरिका के साथ हालिया व्यापार सौदे के बारे में कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं: अमेरिका के साथ ‘बाधाओं को कम करने’ का हमारे डेटा के लिए क्या मतलब है? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में ही रहेंगे? क्या भारत अभी भी विदेशी कंपनियों को डेटा यहां संग्रहीत करने और इसका इस्तेमाल अपना खुद का एआई बनाने के लिए कर सकता है?“पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “हमारी डेटा संप्रभुता, स्वास्थ्य डेटा, एआई और स्थानीय डेटा भंडारण के बारे में हर सवाल का एक ही जवाब मिलता है: ‘ढांचा’, ‘संतुलन’, ‘स्वायत्तता’ - बड़े शब्द, कोई विशिष्टता नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश को यह बताने से इनकार कर रही है कि वह क्या बातचीत कर रही है।गांधी ने कहा, “हमें वैश्विक तकनीकी दौड़ में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय हमें इस बारे में अंधेरे में रखा जा रहा है कि भारत के डेटा की सुरक्षा कैसे की जाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को देश के डेटा के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार है। उन्होंने कहा कि हम एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए अपने डेटा के मालिक होने और उसका उपयोग करने के हकदार हैं।एक अप्रैल को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से अपने प्रश्न में गांधी ने पूछा था कि सरकार अमेरिका-भारत संयुक्त वक्तव्य के तहत डिजिटल व्यापार के लिए बाधाओं को क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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