वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आठ प्रमुख ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने मई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन में वृद्धि करने का रणनीतिक निर्णय लिया है। 5 अप्रैल 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक के बाद, इन देशों ने कुल 2,06,000 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि को लागू करने की घोषणा की है। इस सामूहिक कदम का नेतृत्व सऊदी अरब और रूस करेंगे, जो इस अतिरिक्त उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बाजार में उतारेंगे। यह निर्णय मौजूदा वैश्विक बाजार स्थितियों और भविष्य की ऊर्जा मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उत्पादन वृद्धि का संदर्भ और प्रमुख आंकड़े पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह वृद्धि उन स्वैच्छिक कटौतियों में एक क्रमिक समायोजन है जो पूर्व में लागू की गई थीं। विशेष रूप से, अप्रैल 2023 में जो 1.65 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती घोषित की गई थी, उसी में से अब 2,06,000 बैरल प्रतिदिन को बाजार में वापस लाया जा रहा है। यह वापसी बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर क्रमिक रूप से की जाएगी। सऊदी अरब और रूस: ये दोनों प्रमुख देश 62-62 kbd की सर्वाधिक वृद्धि करेंगे। इसके बाद मई के लिए सऊदी अरब का आवश्यक उत्पादन लक्ष्य 10,228 kbd और रूस का 9,699 kbd हो जाएगा। ये दोनों प्रमुख देश 62-62 kbd की सर्वाधिक वृद्धि करेंगे। इसके बाद मई के लिए सऊदी अरब का आवश्यक उत्पादन लक्ष्य 10,228 kbd और रूस का 9,699 kbd हो जाएगा। इराक और यूएई: इराक अपने उत्पादन में 26 kbd का इजाफा करेगा, जिससे उसका लक्ष्य 4,326 kbd होगा। वहीं, यूएई 18 kbd की वृद्धि के साथ 3,447 kbd का उत्पादन करेगा। इराक अपने उत्प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Crude Oil: मई से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाएगा ओपेक प्लस, सऊदी अरब और रूस की होगी 60% से अधिक हिस्सेदारी
वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आठ प्रमुख ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने मई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन में वृद्धि करने का रणनीतिक निर्णय लिया है। 5 अप्रैल 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक के बाद, इन देशों ने कुल 2,06,000 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि को लागू करने की घोषणा की है। इस सामूहिक कदम का नेतृत्व सऊदी अरब और रूस करेंगे, जो इस अतिरिक्त उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बाजार में उतारेंगे। यह निर्णय मौजूदा वैश्विक बाजार स्थितियों और भविष्य की ऊर्जा मांग को ध्