पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र (भरतपुर, रेगिनगर और बेलडांगा) 2026 के विधानसभा चुनाव का सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गर्म क्षेत्र बन गए हैं। इसका कारण है रेगिनगर में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का निर्माण, जिसने मतदाताओं की निष्ठा को बदलने, धार्मिक पहचान को सशक्त करने और अल्पसंख्यक वोटों को विभाजित करने की संभावनाओं को जन्म दिया है। इस मस्जिद की नींव दिसंबर 2025 में टीएमसी के निलंबित विधायक और अब अजयूप पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रखी थी। यह कदम उनके टीएमसी से निष्कासन के बाद एक स्थानीय प्रतिरोध के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मुर्शिदाबाद के चुनावी माहौल का भावनात्मक केंद्र बन चुका है।पहले ईद की नमाज में मार्च में यहां मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना से भारी संख्या में लोग जुटे। हर रोज ईंट और सीमेंट के ट्रक आते हैं, दान पेटियां भरी रहती हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। निर्माणाधीन मस्जिद अब केवल इमारत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए राजनीतिक प्रतीक बन गई है।भाजपा इसे हिंदू वोट एकजुट करने के लिए राजनीतिक रूप से अमूल्य अवसर मान रही है। पार्टी नेताओं का कहना है ‘बाबरी के नाम पर हर ईंट हिंदू मतदाताओं को जोड़ने में मदद कर रही है। लोग इसे सियासी अपीलमेंट के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।‘टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हुमायूं कबीर अमीन और असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन करके मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में खींच सकते हैं। टीएमसी नेता कहते हैं ‘हुमायूं चुनाव से पहले भावनात्मक मुद्दा बना रहे हैं, लेकिन लोग जानते हैं कि कठिन समय में कौन उनके साथ खड़ा था। विकास और कल्याण ही चुनाव तय करेगा।’ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Bengal Election: मस्जिद निर्माण के चलते मुर्शिदाबाद में चुनावी लड़ाई हुई रोचक, टीएमसी को लग सकता है बड़ा झटका
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र (भरतपुर, रेगिनगर और बेलडांगा) 2026 के विधानसभा चुनाव का सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गर्म क्षेत्र बन गए हैं। इसका कारण है रेगिनगर में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का निर्माण, जिसने मतदाताओं की निष्ठा को बदलने, धार्मिक पहचान को सशक्त करने और अल्पसंख्यक वोटों को विभाजित करने की संभावनाओं को जन्म दिया है। इस मस्जिद की नींव दिसंबर 2025 में टीएमसी के निलंबित विधायक और अब अजयूप पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रखी थी। यह कदम उनके