भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा नेताओं में कोई भेद नहीं करती। उन्होंने कहा कि जनता जिसे भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुशासन के खिलाफ एक योद्धा के रूप में पहचानेगी, जीत के बाद वह पार्टी का चेहरा बन सकता है।भट्टाचार्य ने विधानसभा चुनावों को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी की तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ भाजपा की सीधी लड़ाई के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर घुसपैठियों के खिलाफ ‘पता लगाओ, हिरासत में लो और निर्वासित करो’ की नीति अपनाई जाएगी।एक साक्षात्कार में भट्टाचार्य ने इस सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से उतारना उन्हें पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के बराबर है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी को भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं करती। उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा में चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में भी किसी एक चेहरे को आगे नहीं किया था, फिर भी जीत हासिल की थी।भट्टाचार्य ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी चुनाव में आसानी से बहुमत हासिल करेगी। हालांकि, उन्होंने सीटों की संख्या या दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पार करने के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवनीपुर में अधिकारी को उतारने का निर्णय सीधे तौर पर ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देने के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक सीधा मुकाबला है।सत्ता में आने पर भाजपा की प्राथमिकताओं को बताते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि पहला काम राज्य में कानून का शासन स्थापित करना होगा। दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि चुनाव के बाद कोई हिंसा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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