केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक को अभूतपूर्व सुधार बताते हुए कहा कि इस पैमाने पर बदलाव का उदाहरण न तो भारत में पहले देखा गया है और न ही दुनिया में कहीं और। उन्होंने बताया कि एक साथ 79 संसदीय अधिनियमों के करीब 1,000 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें आजादी के पहले के छह कानून भी शामिल हैं। विधेयक संसद से हुआ पारित संसद ने गुरुवार को जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार ने विभिन्न कानूनों में मौजूद कई आपराधिक प्रावधानों को खत्म कर उन्हें सरल और तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य कारोबार सुगमता और आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है। जन विश्वास बिल 2026: अपराध-मुक्ति के प्रमुख प्रावधान छोटे उल्लंघनों पर राहत: मामूली या तकनीकी गलतियों के लिए अब जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों को आपराधिक अपराध के बजाय प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा। मामूली या तकनीकी गलतियों के लिए अब जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों को आपराधिक अपराध के बजाय प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा। सार्वजनिक स्थानों से जुड़े नियम: मेट्रो में धूम्रपान, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा। मेट्रो में धूम्रपान, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा। व्यापार और अनुपालन में सुधार: ड्रग्स और कॉस्मेटिक कानून के तहत कुछ मानकों के उल्लंघन पर पहले जहां जेल का प्रावधान था, अब उसकी जगह एक लाख रुपये तक का …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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