दरअसल, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा। उन्होंने साफ-साफ कहा कि यह हमारी लड़ाई नहीं है।उनका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नाटो सहयोगी देशों की तरफ से ब्रिटेन पर इस जंग में कूदने का भारी दबाव बनाया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि वह देश की सेना को किसी ऐसे आक्रामक अभियान का हिस्सा नहीं बनने देंगे, जिससे ब्रिटेन के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचे।वहीं, ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने एलान किया है कि जंग की मार झेल रहे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन इसी हफ्ते करीब 35 देशों की एक ‘महाबैठक’ की मेजबानी करने जा रहा है। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने बताया कि इस बेहद संवेदनशील बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर करेंगी। हालांकि, उन्होंने बैठक के सटीक दिन का खुलासा अभी नहीं किया है।प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि इस चर्चा में हम उन सभी कूटनीतिक और राजनीतिक कदमों का आकलन करेंगे, जो हम होर्मुज की आजादी को बहाल करने के लिए उठा सकते हैं। हमारा मकसद वहां फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरी सामानों की आवाजाही को फिर से शुरू करना है। कीर स्टार्मर ने कहा कि इस बैठक के बाद हम सैन्य योजनाकारों को भी एक साथ लाएंगे। उनका काम यह देखना होगा कि युद्ध खत्म होने के बाद हम अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल कैसे करें, जिससे इस समुद्री रास्ते को हमेशा के लिए सुरक्षित और सुलभ बनाया जा सके।इस महाबैठक में वे देश शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में एक साझा बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इन देशों …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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