यह वीडियो/ हटाएं पिछले साल की कुल वृद्धि से ज्यादा का हो सकता है नुकसान संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध से पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को उनकी सामूहिक जीडीपी का 3.7 से 6 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। यह नुकसान अधिकतम 194 अरब डॉलर तक हो सकता है। यह कुल आर्थिक नुकसान 2025 में पश्चिम एशिया क्षेत्र द्वारा हासिल की गई जीडीपी वृद्धि से भी अधिक हो सकता है। 40 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं ‘मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट: इकोनॉमिक एंड सोशल इम्प्लिकेशंस फॉर द अरब स्टेट्स रीजन’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरोजगारी दर में लगभग 4 प्रतिशत अंकों तक वृद्धि हो सकती है, जिससे करीब 36 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं। यह संख्या 2025 में सृजित कुल नौकरियों से भी अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते लगभग 40 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं। रिपोर्ट में क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया गया है, जो यह दिखाती हैं कि अल्पकालिक सैन्य तनाव भी पश्चिम एशिया में लंबे समय तक व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, मानव विकास सूचकांक (HDI) के आधार पर पश्चिम एशिया का मानव विकास लगभग 0.2 से 0.4 प्रतिशत तक गिर सकता है, जो करीब आधे वर्ष से लेकर लगभग एक वर्ष तक की प्रगति के नुकसान के बराबर है। ये भी पढ़ें- संयुक्त राष्ट्र ने अरब देशों को दी सलाह यूएनडीपी के अरब देशों के क्षेत्रीय ब्यूरो के निदेशक और संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव अब्दल्लाह अल दरदारी ने बताया, ‘यह संकट क्षेत्र के देशों के लिए चेतावनी है कि वे अपनी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
पश्चिम एशिया युद्ध की भारी कीमत: जीडीपी में 2025 की बढ़ोतरी से ज्यादा का नुकसान, UN की रिपोर्ट में अहम खुलासा
यह वीडियो/ हटाएं पिछले साल की कुल वृद्धि से ज्यादा का हो सकता है नुकसान संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध से पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को उनकी सामूहिक जीडीपी का 3.7 से 6 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। यह नुकसान अधिकतम 194 अरब डॉलर तक हो सकता है। यह कुल आर्थिक नुकसान 2025 में पश्चिम एशिया क्षेत्र द्वारा हासिल की गई जीडीपी वृद्धि से भी अधिक हो सकता है। 40 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं 'मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट: इकोनॉमिक एंड सोशल इम्प्ल