देश में जीएसटी संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 2,00,064 करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है। जीएसटी संग्रह बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये पहुंचा पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। यह आंकड़े टैक्स कलेक्शन में लगातार बने हुए मजबूत रुझान को दर्शाते हैं। मार्च में दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना साल के अंत में बेहतर अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत माना जा रहा है। आयात में हुई वृद्धि से आईसीएसटी संग्रह बढ़ा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू जीएसटी राजस्व मार्च में 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो देश के भीतर स्थिर खपत को दर्शाता है। वहीं, आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती आयात गतिविधियों और बेहतर कस्टम्स कलेक्शन की ओर इशारा करती है। आयात में भारी वृद्धि के चलते मार्च में आईजीएसटी संग्रह बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये हो गया। सीजीएसटी और एसजीएसटी संग्रह में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो केंद्र और राज्य कर घटकों में संतुलित वृद्धि को दर्शाती है। जीएसटी रिफंड में हुई 13.8% की वृद्धि मार्च में कुल जीएसटी रिफंड में सालाना आधार पर 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 22,074 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड को समायोजित करने के बाद, शुद्ध जीएसटी राजस्व में सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 के लिए शुद्ध ज …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
GST Collection: मार्च में जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के पार, सरकार की तिजोरी में जमा हुए 22.27 लाख करोड़
देश में जीएसटी संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 2,00,064 करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है। जीएसटी संग्रह बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये पहुंचा पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। यह आंकड़े टैक्स कलेक्शन में लगातार बने हुए मजबूत रुझान को दर्शाते हैं।