भारत में 1 अप्रैल 2026 से आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव हो रहा है। छह दशक पुराने आयकर कानून की विदाई होने वाली है तो ‘आयकर अधिनियम, 2025’ अमल में आने वाला है। वहीं, जीएसटी 2.0 के तहत घोषित एलानों के लागू होने के बाद अब देश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह से बदलने की ओर बढ़ रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी के वेतन, बचत, रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ेगा यह तय है। कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का एलान कर रखा है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया के तनाव और नए विनियामक नियमों के कारण एलपीजी, दवाएं और कारें महंगी हो रही हैं। 31 मार्च 2026 की आधी रात से पहले चार कामों को निपटाना है जरूरी ऐसे में नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करने से पहले आम आदमी के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि 31 मार्च की डेडलाइन चूकने का क्या नुकसान है और 1 अप्रैल से उनकी आर्थिक जिंदगी में क्या-क्या बदलने वाला है? आइए सबकुछ आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर आपको पेनल्टी और वित्तीय नुकसान से बचने के लिए ये काम 31 मार्च तक पूरे करने होंगे: टैक्स सेविंग और निवेश: धारा 80C और 80D के तहत टैक्स छूट पाने के लिए पीपीएफ, ईएलएसएस, और जीवन बीमा में निवेश 31 मार्च से पहले कर लें, अन्यथा इसका लाभ चालू वित्त वर्ष में नहीं मिलेगा। धारा 80C और 80D के तहत टैक्स छूट पाने के लिए पीपीएफ, ईएलएसएस, और जीवन बीमा में निवेश 31 मार्च से पहले कर लें, अन्यथा इसका लाभ चालू वित्त वर्ष में नहीं मिलेगा। खातों को सक्रिय रखना: पीपीएफ, एनपीएस और सुकन्या समृद्धि योजना को निष्क्रिय होने और पेनल्टी से बचाने के लिए न्यूनतम अनिवार्य राशि जमा करना आवश …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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