सवाल: रुपये की गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई क्या कर रहा है? जवाब: भारत का केंद्रीय बैंक होने के नाते आरबीआई रुपये में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए समय-समय पर हस्तक्षेप करता है। हाल-फिलहाल मार्च 2026 तक उपलब्ध लगभग 723 अरब डॉलर के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग इसके लिए किया गया है। इससे बीते कुछ हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दिखी है। मार्च के पहले सप्ताह में युद्ध संकट के दौरान आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में सीधे तौर पर लगभग 12 से 15 बिलियन डॉलर बेचे थे। इसके साथ ही आरबीआई अपतटीय (देश के बाहर) एनडीएफ बाजार और प्री-मार्केट में भी डॉलर बेचकर सट्टेबाजों से रुपये को बचाने की जुगत लगाता है। सवाल: क्या लगातार कमजोर होते रुपये का मतलब कमजोर अर्थव्यवस्था है? जवाब: बिल्कुल नहीं। रुपये का किसी भी मुद्रा के साथ विनिमय दर केवल एक व्यापारिक संतुलन का उपकरण है। उदाहरण के लिए, जापानी येन डॉलर के मुकाबले पिछले एक दशक में बहुत अधिक कमजोर हुआ हुआ है, फिर भी जापान अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ईरान भी इसका एक बड़ा उदाहरण है। बीते एक दशक में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की मुद्रा डॉलर के मुकाबले कहीं नहीं टिकती। हालांकि आज जब ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं, ईरान अपनी कमजोर मुद्रा के बावजूद दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सामने तन कर खड़ा है। रुपये का ₹94.83 के स्तर तक गिरना घरेलू मुद्रा में कमजोरी के बजाय वैश्विक डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक कारणों से है और इससे भारत की 8.2% की शानदार जीडीपी वृद्धि दर पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ता फिलहाल नहीं दिखता। हालांकि, अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण हालातों का सामना समय-समय पर जरूर करना पड़ेगा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Rupee vs Dollar: शतक लगाने की दहलीज पर रुपया? भारतीय मुद्रा में गिरावट की पूरी कहानी आसान भाषा में यहां समझें
सवाल: रुपये की गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई क्या कर रहा है? जवाब: भारत का केंद्रीय बैंक होने के नाते आरबीआई रुपये में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए समय-समय पर हस्तक्षेप करता है। हाल-फिलहाल मार्च 2026 तक उपलब्ध लगभग 723 अरब डॉलर के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग इसके लिए किया गया है। इससे बीते कुछ हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दिखी है। मार्च के पहले सप्ताह में युद्ध संकट के दौरान आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में सीधे तौर पर लगभग 12 से 15 बिलियन डॉलर बेचे थे। इसके साथ ही आरबीआई अपतटीय