‘‘जितना भी चोरी छिपे राष्ट्रपति शासन लगा लो, मैं अकेली ही एक सौ हूं। मैं अवाक हूं कि इतना भय! इतनी भी हिम्मत नहीं है कि मुझसे एकबार चर्चा तो कर लें। चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, डीजीपी, सीपी सब बदल दिए। यदि कोई दुर्घटना हुई तो इसका जिम्मेदार बीजेपी और वैनिश कुमार (ज्ञानेश कुमार) होंगे। एक महीना बाद मैं ही रहूंगी और मेरे यह लोग। फिर क्या होगा?"" राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी चुनावी रैली की शुरुआत इससे ही कर रही हैं।दूसरी तरफ ममता सरकार और टीएमसी के वकीलों के पैनल के सदस्य अर्क कुमार नाग ने कलकत्ता हाइकोर्ट में एक पीआईएल (जनहित याचिका) दायर की है। चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के बेंच में इसकी सुनवाई भी चालू हो गई है। सुनवाई के दौरान तृणमूल सांसद वकील कल्याण बनर्जी ही पक्ष रख रहे हैं।कल्याण बनर्जी ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति शासन लग चुका है? जिस तरह से तबादले हुए हैं वह राष्ट्रपति शासन के दौरान ही होते हैं। 63 पुलिस ऑफिसर, 16 आईएएस और 13 पुलिस सुपर को उनके पदों से अब तक हटाया जा चुका है। आगे भी होगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।सवाल यह है कि आखिर ममता बनर्जी, इनकी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्त्ताओं, समर्थकों को क्यों लग रहा है कि अघोषित राष्ट्रपति शासन लग चुका है?दरअसल इस राज्य में सात से आठ चरणों में मतदान होता था, इस दफे दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। दो चरणों में मतदान 49 साल बाद हो रहा है, जनता पार्टी के शासनकाल में 1977 में दो चरणों में आखिरी बार मतदान हो रहा है। बंगाल में जितने अधिक चरणों में मतदान होता है, इसका लाभ सत्ताधारी दल को होता है।चुनाव आयोग ने 15 मार्च की शाम को विधानसभा चुनाव की घोषणा की। उसी रात चुनाव …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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