अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई बदलते समय के साथ बदलते हास्य रस यानी कॉमेडी के हुनर की। आज के समय में भले ही स्टैंड अप कॉमेडी और इससे जुड़े मौके बढ़ रहे है, लेकिन साथ ही बढ़ें हैं इससे जुड़े जोखिम। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं मुद्दों पर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना की आखिर आज के समय में कॉमेडियन होना कितना कठिन है। नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें लेखक और व्यंग्यकार आलोक पुराणिक और स्टैंड अप कॉमेडियन अभिमन्यु सिंह शामिल रहे। दोनों ने ही आज के समय में कॉमेडी से जुड़े कई पहलुओं पर बात की। मसलन- स्टैंड अप कॉमेडी और सटायर में क्या अंतर है? स्टैंड अप कॉमेडी के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? क्या आज कॉमेडी करने के लिए विवाद ‘जरूरी मसाला’ बन गया है? क्या दर्शक खुद डुअल मीनिंग और बोल्ड कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं? बतरस में मेहमानों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि क्या फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर किसी भी विषय पर मजाक सही है। क्या पुराने दौर की साफ-सुथरी कॉमेडी आज भी सफल हो सकती है? क्या राजनीतिक विषयों पर मजाक की कोई सीमा होनी चाहिए? क्या डबल मीनिंग कॉमेडी आसान रास्ता है? क्या कॉमेडी का स्तर गिर रहा है या सिर्फ उसका फॉर्म बदल रहा है? …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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