शशि थरूर ने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 फीसदी लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात करता है। सबसे डराने वाली बात यह है इसका 90 फीसदी हिस्सा कतर और खाड़ी देशों से आता है। थरूर ने कहा, “आज जो युद्ध के हालात बने हैं, उससे आपकी रसोई के सिलेंडर, रेस्टोरेंट और ढाबों में गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई है। अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में एलपीजी की सप्लाई ठप हो सकती है।“थरूर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की तारीफ की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह तूफान से पहले की शांति जैसा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इसका सीधा असर भारत के ट्रांसपोर्टेशन और रसद पर पड़ेगा। इसके बाद हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो जाएगी।थरूर ने दावा किया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के जरिए शांति वार्ता की खबर आ रही है। लेकिन, दूसरी तरफ हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने कहा, “ईरान की भाषा शांति का संकेत नहीं दे रही है।“शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
पश्चिम एशिया तनाव: US-ईरान जंग नहीं रुकी तो बुझ जाएंगे कई घरों के चूल्हे; भारत के रूख पर क्या बोले शशि थरूर?
शशि थरूर ने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 फीसदी लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात करता है। सबसे डराने वाली बात यह है इसका 90 फीसदी हिस्सा कतर और खाड़ी देशों से आता है। थरूर ने कहा, "आज जो युद्ध के हालात बने हैं, उससे आपकी रसोई के सिलेंडर, रेस्टोरेंट और ढाबों में गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई है। अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में एलपीजी की सप्लाई ठप हो सकती है।"थरूर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की तारीफ की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि