चार दशकों से अधिक समय तक भारत और अन्य देशों में आतंकवाद को प्रायोजित और संचालित किया है। ओसामा बिन लादेन और अन्य खतरनाक वैश्विक आतंकवादियों को दशकों तक पनाह दी। परमाणु अप्रसार कानूनों का घोर उल्लंघन कर अन्य देशों को परमाणु क्षमता हासिल करने में मदद की। ए.क्यू. खान नेटवर्क की भूमिका अच्छी तरह दस्तावेजीकृत है और स्वयं तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने भी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। अफगानिस्तान में अस्पतालों और नागरिक ठिकानों पर बेरहमी से बमबारी की और विभिन्न प्रांतों-बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में अपने ही नागरिकों तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा। इसको लेकर जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह वास्तव में घोर आपत्तिजनक है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। उन्होंने लिखा यह वही देश है जिसकी राज्य व्यवस्था ने-बावजूद इसके पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका के लिए उपयुक्त माना जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की वास्तविकता और उसके तरीके दोनों पर बेहद गंभीर सवाल उठाती है।कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय से की। उन्होंने कहा कि 26/11 के मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला कर दिया था। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। अप्रैल 2025 में पहलगाम हमलों के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के भड़काऊ बयानों के बावजूद, भारत उसे अलग-थलग करने में नाकाम रहा है, बल्कि इसके उलट पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ गया है। रमेश ने दावा किया कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन गए …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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