1 of 6 व्हाइट जर्सी में लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन और कमेंट्री करते हुए भी; साथ में गावस्कर और मुरली - फोटो : Twitter अब उन्होंने खुलासा किया है कि इसका कारण केवल उनकी प्रतिभा या खेल में सुधार की कमी ही नहीं थी, बल्कि उनके साथ ही नस्लीय टिप्पणी भी थी। हाल ही में एक इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक इंटरव्यू में, शिवरामाकृष्णन ने अन्य कारणों के बारे में खुलकर बात की। उनका कहना है कि अन्य कारणों ने भी उन पर एक गहरा मानसिक घाव छोड़ा है, जिसे मिटाना उनके लिए मुश्किल रहा है। शिवरामाकृष्णन ने कहा कि नस्लवाद की घटनाओं से उन्हें बार-बार गुजरना पड़ा। कभी भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक माने जाने वाले लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन का अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही लंबा न रहा हो, लेकिन उन्होंने खेल के मैदान पर अपनी फिरकी से सलीम मलिक और इमरान खान समेत कई दिग्गजों को परेशान किया। हालांकि, उनकी प्रतिभा और शुरुआती शानदार प्रदर्शन के बावजूद, वह आगे चलकर उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 6 लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन - फोटो : Twitter बचपन का पहला कड़वा अनुभव ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू के मुताबिक, शिवरामाकृष्णन के जीवन के साथ पहली नस्लीय घटना तब हुई, जब वह केवल 14 वर्ष के थे। वह चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में भारतीय टीम के लिए नेट गेंदबाज के तौर पर शामिल हुए थे। अपनी जर्सी में ही वह स्टेडियम के एक छोटे से कमरे में कपड़े बदलने के लिए दौड़े, तभी एक वरिष्ठ भारतीय बल्लेबाज ने उन्हें पुकारा। शिवरामाकृष्णन ने बताया कि उस वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ी ने उनसे उनके जूते साफ करने को कहा। इस टिप्पणी से स्तब्ध शिवरामाकृष्णन ने याद करते हुए कहा, ‘मैंने बस उ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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