डॉ. फतहाली ने कहा कि भारत के पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े हुए सभी देशों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इसी के चलते ये भारत को गलतफहमियों को दूर करने और कूटनीतिक रास्तों को मजबूत करने में एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित करते हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है।पश्चिम एशिया में युद्ध की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि युद्ध जारी है। उन्होंने दोहराया कि ईरान ने इस युद्ध को शुरू नहीं किया था, लेकिन इसे खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध का खात्मा ईरान की वैध शर्तों और मांगों के समाधान पर निर्भर करेगा।उन्होंने युद्ध रोकने के लिए ईरान की शर्तें बताते हुए कहा कि आक्रामक कार्रवाईयों पर पूरी तरह से लगाम लगे, हमले दोबारा नहीं होंगे इसके लिए विश्वसनीय गारंटी दी जाए, हमलावरों को जवाबदेह ठहराया जाए, इसी के साथ ईरान के कानूनी अधिकारों और हितों का सम्मान सुनिश्चित किए जाएं।डॉ. फतहाली ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान अपने देश की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की कीमत आत्मसमर्पण से कम है और यही सिद्धांत ईरान के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों ने प्रतिरोध का मार्ग चुना है।ईरानी राजदूत ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की अमेरिका के साथ कोई सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम को लेकर कहा कि ईरान इससे न तो डरता है और न ही उनकी बातचीत के प्रस्तावों …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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