आज का शब्द: महामाया और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की कविता- रमण मन के मान के तन ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- महामाया, जिसका अर्थ है- प्रकृति, दुर्गा। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता- रमण मन के मान के तन रमण मन के, मान के तन! तुम्हीं जग के जीव-जीवन! तुम्हीं में है महामाया, जुड़ी छुटकर विश्वकाया; कल्पतरु की कनक-छाया तुम्हारे आनन्द-कानन। तुम्हारी स्वर्सरित बहकर हर रही है ताप दुस्तर; तुम्हारे उर हैं अमर-मर, दिवाकर, शशि, तारकागण। तुम्हीं से ऋतु घूमती है, नये कलि-दल चूमती है, नये आसव झूमती है, नये गीतों, नये नर्तन! हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 6 घंटे पहले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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