ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के 78वें चरण की घोषणा की। इसके तहत इस्राइल के डिमोना, तेल अवीव और ईलाट जैसे अत्यधिक संवेदनशील ठिकानों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने इन हमलों में इमाद और काद्र (मल्टी-वारहेड) मिसाइल प्रणालियों और हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल किया है। आईआरजीसी का दावा है कि हालिया हमलों में डिमोना और अराद शहर में 200 से अधिक लोग हताहत हुए थे।दूसरी ओर वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के संकेत दिए हैं। सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने किंग फाहद एयर बेस तक पहुंच प्रदान करने पर सहमति जताई है, जबकि पहले वह अपने एयर बेस के इस्तेमाल से इनकार करता रहा था। कूटनीतिक मोर्चे पर सऊदी ने ईरान के सैन्य अताशे और चार दूतावास कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, यूएई ने ईरान के मालिकाना हक वाले एक अस्पताल और क्लब को बंद कर दिया है, जो तेहरान के लिए अहम माने जाते थे। यूएई की हवाई रक्षा प्रणाली भी ईरानी हमलों को रोकने में जुटी है। कुछ वीडियो से यह भी संकेत मिले हैं कि ईरान पर हमलों के लिए बहरीन से मिसाइलें दागी गई थीं।इस युद्ध की आग में पड़ोसी देशों भी झुलस रहे हैं। मंगलवार तड़के कुवैत में हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा मिसाइलों को रोकने के दौरान गिरे मलबे से सात बिजली ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है। अधिकारी बिजली सेवा बहाल करने में जुटे हैं।इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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