पेट्रोलियम पदार्थों से समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले महासागरों से जोड़ने वाले एकमात्र समुद्री चैनल, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों को किसी देश से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह दावा किया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि शिपिंग कंपनियां सुरक्षा और अन्य स्थितियों पर विचार करने के बाद आवाजाही का निर्णय लेती हैं। उन्होंने ईरान के साथ किसी समझौते की बात को खारिज किया। भारतीय जहाजों की आवाजाही पर क्या अपडेट? अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने के बाद जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी। ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाया था। सिंह ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन सम्मेलनों के तहत आता है। यहां आवाजाही की स्वतंत्रता है। चूंकि जलडमरूमध्य संकरा है, इसलिए केवल प्रवेश और निकास लेन ही चिह्नित हैं जिनका शिपिंग लाइनों को पालन करना होता है। 23 मार्च को दो और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। ये जहाज 26 या 27 मार्च को भारतीय तट पर पहुंचने की उम्मीद है। एलपीजी टैंकर पाइन गैस करीब 45,000 टन एलपीजी ले जा रहा है और 27 मार्च को न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचेगा। जग वसंत 47,612 टन एलपीजी के साथ 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में कुल 92,612 टन एलपीजी है और 33 तथा 27 भारतीय नाविक सवार हैं। इससे पहले, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें