इस समझौते की सबसे खास बात भाजपा का बढ़ता कद है। समझौते के तहत, बीजेपी इस बार 27 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा अब उत्तर के साथ-साथ दक्षिण के किले को भी भेदने के लिए तैयार है।इस बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, पीएमके के कद्दावर नेता अंबुमणि रामदास और एएमएमके प्रमुख टीटीबी दिनाकरण मौजूद रहे। दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बीजेपी ने इस बार अपनी रणनीति बदली है। इतनी बड़ी संख्या में सीटों का मिलना बताता है कि पार्टी अब तमिलनाडु में सिर्फ एक सहयोगी दल नहीं, बल्कि एक मुख्य खिलाड़ी की भूमिका में है।वहीं, सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत उत्तरी तमिलनाडु में मजबूत पकड़ रखने वाली पीएमके को 18 सीटें दी गई हैं। वन्नियार समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए पीएमके का साथ होना गठबंधन के लिए संजीवनी माना जा रहा है। इस बार एएमएमके को 11 सीटें दी गई हैं। तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं।पलानीस्वामी ने कहा कि यह गठबंधन डीएमके सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए बनाया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि AIADMK और AMMK के वोट एक साथ जुड़ जाते हैं, तो डीएमके के लिए राह बेहद मुश्किल हो जाएगी। अब देखना यह है कि यह यह समझौता जमीन पर वोटों में कितना तब्दील हो पाता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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