1 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला हाथ में 15 किलो का फरसा, रात में सड़कों पर गश्त और गो तस्करी के खिलाफ सख्त तेवर, यही पहचान थी चंद्रशेखर बाबा की, जिन्हें पूरा ब्रज क्षेत्र फरसे वाले बाबा के नाम से जानता था। अब उनके निधन के बाद यही छवि लोगों की यादों में जिंदा है। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला मूल रूप से फिरोजाबाद के नगला भूपाल (सिरसागंज) के रहने वाले चंद्रशेखर बाबा ने 19 साल की उम्र में ही सांसारिक जीवन त्याग दिया था। अयोध्या में कार सेवा में भाग लिया और इसके बाद संन्यास लेकर विवादित विवाद के समय भाग लिया किसके बाद उन्होंने संन्यास लिया और फिर जीवन गोरक्षा को समर्पित कर दिया। उनके पैतृक गांव में उनके बड़े भाई और उनका पूरा परिवार है। बाबा के माता-पिता का उनके बचपन में ही देहांत हो गया था। 3 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला बाबा के बड़े भाई केशव बताते हैं कि बाबा अपने पैतृक गांव में केवल धार्मिक कार्यों में ही जाते थे, लगुन-विवाह जैसे कार्यक्रमों में वे नहीं जाते थे। बरसाना, नंदगांव कोसीकलां और आसपास के इलाकों में बाबा की अलग ही पहचान थी। वह अपने साथ हमेशा फरसा रखते थे, जो उनके लिए सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि गोरक्षा का प्रतीक बन गया था। 4 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला बाबा ने गोरक्षकों की एक टीम बना रखी थी, जो रात-दिन सक्रिय रहती थी। गो तस्करी की सूचना मिलते ही बाबा खुद मौके पर पहुंचते थे। समर्थकों के अनुसार, उन्होंने कई बार तस्करी के प्रयासों को नाकाम किया और सैकड़ों गोवंश का जीवन बचाया। उनकी दिनचर्या भी असाधारण थी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
फरसा वाले बाबा की मौत: हाथ में 15 किलो का हथियार, रात में गोतस्करों को पकड़ने निकलते थे, कई बार हुए घातक हमले
1 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला हाथ में 15 किलो का फरसा, रात में सड़कों पर गश्त और गो तस्करी के खिलाफ सख्त तेवर, यही पहचान थी चंद्रशेखर बाबा की, जिन्हें पूरा ब्रज क्षेत्र फरसे वाले बाबा के नाम से जानता था। अब उनके निधन के बाद यही छवि लोगों की यादों में जिंदा है। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 6 फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल - फोटो : अमर उजाला मूल रूप से फिरोजाबाद के नगला भूपाल (सिरसागंज) के रहने वाले चंद्रशेखर बाबा ने 19 साल की उम्र में ही सांसारिक जीवन त्याग दिया था। अयोध्या में