हम भारत में हमारे सभी भाई-बहनों के प्रति शुक्रगुजार हैं क्योंकि उन्होंने हमदर्दी दिखाई। दरअसल, हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया। हम यह जंग नहीं चाहते थे। हमने अपनी ओर से हरसंभव प्रयास किया कि हमारे क्षेत्र में यह युद्ध न हो। बातचीत में कई उपलब्धियां हासिल हुई थीं। हमें लगा था कि एक अच्छा समझौता होगा और यह युद्ध कभी शुरू नहीं होगा, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने ही इस युद्ध की शुरुआत की। उन्होंने यह युद्ध ईरान पर थोपा है। युद्ध का असर केवल ईरानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक संकट बन चुका है। दुनियाभर के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। गैस, कच्चा तेल, पेट्रोल और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं। हमने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को खो दिया। हमने अपने कई नेताओं और कमांडरों को भी खोया है और अब हमें अपनी रक्षा करनी है।मुझे नहीं पता कि यह युद्ध कितने समय तक चलेगा, लेकिन हम इसे जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तैयार हैं। हम नहीं चाहते कि यह युद्ध जारी रहे, लेकिन हमारी कुछ शर्तें हैं, जिनका उल्लेख हमारे राष्ट्रपति ने भी किया है। अगर वे समझौते के लिए आगे नहीं आते हैं, तो हम युद्ध जारी रखने के लिए भी तैयार हैं। हम मजबूत स्थिति में हैं। हमारे पास इतनी शक्ति है कि हम इस युद्ध को दो-तीन साल से अधिक समय तक भी जारी रख सकते हैं। हमारे पास युद्ध का अनुभव भी है। हमने आठ साल तक युद्ध झेला है। इस दौरान बहुत अनुभव हासिल भी किया है। हमारे लोग भी इसके लिए तैयार हैं।अब भी हम युद्ध नहीं चाहते क्योंकि बहुत से लोग इससे पीड़ित हैं, खासकर हमारे पड़ोसी देशों के लोग। ये जो कुछ हो रहा है, उससे हम खुश नहीं हैं, लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प भी नहीं है। कुछ लोग यह भी कह रहे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Exclusive: 'ईरान के पास दो-तीन साल तक जंग जारी रखने की ताकत...': सर्वोच्च नेता के भारत में विशेष प्रतिनिधि
हम भारत में हमारे सभी भाई-बहनों के प्रति शुक्रगुजार हैं क्योंकि उन्होंने हमदर्दी दिखाई। दरअसल, हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया। हम यह जंग नहीं चाहते थे। हमने अपनी ओर से हरसंभव प्रयास किया कि हमारे क्षेत्र में यह युद्ध न हो। बातचीत में कई उपलब्धियां हासिल हुई थीं। हमें लगा था कि एक अच्छा समझौता होगा और यह युद्ध कभी शुरू नहीं होगा, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने ही इस युद्ध की शुरुआत की। उन्होंने यह युद्ध ईरान पर थोपा है। युद्ध का असर केवल ईरानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक संकट बन चुका है। द