उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इन युद्धों को देख रही है। इनसे हमें यह सबक मिलता है कि भारत को ड्रोन बनाने के लिए एक ऐसा ईकोसिस्टम तैयार करना होगा, जिसमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हों। रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत की रक्षा तैयारियों और अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है। उन्होंने घरेलू रक्षा कंपनियों के प्रमुखों और सरकारी अधिकारियों से कहा कि हमें ड्रोन तकनीक में किसी भी दूसरे देश के भरोसे नहीं रहना चाहिए।राजनाथ सिंह ने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब केवल पूरा ड्रोन बनाना नहीं है, बल्कि उसके हर छोटे-बड़े पुर्जे का निर्माण भारत में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन के सांचे, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी जैसी सभी चीजें ‘मेड इन इंडिया’ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी माना कि यह काम चुनौतीपूर्ण है। इसका कारण यह है कि दुनिया के कई देश ड्रोन तो बनाते हैं, लेकिन उनके जरूरी पुर्जे किसी न किसी देश से ही आयात करते हैं। भारत को इस चुनौती को पार करना होगा।इसके अलावा, रक्षा मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें आज पूरी दुनिया में निर्माण के तरीके को बदल रही हैं। सिमुलेशन टेक्नोलॉजी भी भविष्य के लिए नए रास्ते खोल रही है। इस सम्मेलन में देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों के बड़े अधिकारी और रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद रहे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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