12:00 PM, 19-Mar-2026 Maa Shailputri Katha: मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। जब माता सती को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो उन्होंने वहां जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण जाना उचित नहीं है, लेकिन सती के आग्रह पर उन्होंने अनुमति दे दी। जब माता सती अपने मायके पहुंचीं, तो वहां उनका सम्मान नहीं हुआ। उनकी बहनों ने उनका मजाक उड़ाया और राजा दक्ष ने भी भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं। अपने पति का अपमान सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने क्रोध व दुःख में आकर योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना से भगवान शिव अत्यंत दुखी और क्रोधित हुए। उन्होंने यज्ञ का नाश कर दिया। बाद में माता सती ने पुनर्जन्म लिया और पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मीं, जिन्हें मां शैलपुत्री कहा गया। आगे चलकर उनका विवाह फिर से भगवान शिव से हुआ। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विशेष रूप से की जाती है और उन्हें घी का भोग अर्पित किया जाता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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