फरवरी 2026 में भारत के व्यापारिक मोर्चे पर एक मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का व्यापार घाटा मासिक आधार पर कम होकर 27.1 अरब डॉलर रह गया है। हालांकि, यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है, क्योंकि पश्चिमी एशिया में ईरान विवाद के कारण बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक टैरिफ नीतियों में अनिश्चितता ने व्यापार प्रवाह और भारतीय निर्यातकों की धारणा पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। आयात-निर्यात की ताजा स्थिति वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा 27.10 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा जनवरी महीने के 34.68 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से काफी कम है। रॉयटर्स पोल में अर्थशास्त्रियों ने इस घाटे के 28.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, जिससे ताज़ा आंकड़े बेहतर साबित हुए हैं। भू-राजनीतिक तनाव और निर्यातकों पर असर हालांकि, पिछले साल फरवरी के 14.42 अरब डॉलर के मुकाबले वार्षिक आधार पर घाटे में विस्तार हुआ है, जिसका मुख्य कारण आयात में भारी वृद्धि है। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत का निर्यात 36.61 अरब डॉलर और आयात 63.71 अरब डॉलर रहा। वहीं, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में अप्रैल से फरवरी की अवधि के लिए, भारत का कुल वस्तु निर्यात पिछले वर्ष के 395.66 अरब डॉलर से 1.84% बढ़कर 402.93 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भले ही मासिक घाटे में कमी आई हो, लेकिन वैश्विक व्यापार प्रवाह पर नए संकट मंडरा रहे हैं। आपूर्ति शृंखला में बाधा: मध्य पूर्व, विशेषकर ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने ऊर्जा बाज़ारों और पश्चिमी एशिया के प्रमुख समुद्री मार्गों को बाधित कर दिया है। मध्य पूर्व, विशेषकर ईरान से जुड़ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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