पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों की दिशा तेजी से बदल रही है। निवेश बैंक जेफरिज की एक रिपोर्ट के अनुसार इस संकट से रूस और चीन सबसे बड़े आर्थिक लाभार्थी के रूप में उभर रहे हैं। तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उछाल रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे रूस की ऊर्जा आय में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रूस की वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है। रूस और चीन को मिल रहा फायदा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस भू-राजनीतिक स्थिति के चलते भारत के लिए रूसी तेल खरीदने को लेकर चिंताएं भी कम हुई हैं। बढ़ती कीमतों के बीच रूस की ऊर्जा आपूर्ति फिर से महत्वपूर्ण बन गई है। दूसरी ओर चीन को अपेक्षाकृत स्थिर घरेलू बाजार का लाभ मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चीन की सरकार शेयर बाजार को धीरे-धीरे मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि गिरते रियल एस्टेट सेक्टर की जगह शेयर बाजार चीनी परिवारों के लिए संपत्ति सृजन का प्रमुख साधन बन सके। शंघाई बाजार में धीमी बुल मार्केट को सरकार की दीर्घकालिक नीति माना जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा मार्गों में व्यवधान को लेकर दी गई चेतावनी हालांकि रिपोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि अगर वैश्विक ऊर्जा मार्गों में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका का फैसला इस बीच अमेरिका ने अगले सप्त …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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