यह जांच 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की जा रही है। यह वही कानून है जिसके तहत अमेरिका किसी देश की व्यापारिक नीतियों को अनुचित मानते हुए एकतरफा टैरिफ बढ़ा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह हैं या नहीं।अमेरिका ने जिन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है उनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, कंबोडिया, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, मलयेशिया, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों की औद्योगिक नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में अत्यधिक उत्पादन हो रहा है और इसका असर अमेरिकी उद्योगों पर पड़ रहा है।अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण तो नहीं हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इन नीतियों के कारण अमेरिकी व्यापार पर बोझ पड़ रहा है या उसका विस्तार सीमित हो रहा है। जांच में विनिर्माण क्षेत्र में अतिरिक्त उत्पादन और क्षमता से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह अपने औद्योगिक आधार को कमजोर नहीं होने देगा। अधिकारियों के मुताबिक कई देशों में अतिरिक्त उत्पादन को अमेरिकी बाजार में निर्यात किया जा रहा है। इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। इसलिए ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है ताकि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिल सके।इस जांच प्रक्रिया के तहत 17 मार्च से टिप्पणियां द …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
फिर बढ़ा टैरिफ का खतरा: अमेरिका ने भारत समेत 16 व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ शुरू की जांच, क्या हैं आरोप?
यह जांच 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की जा रही है। यह वही कानून है जिसके तहत अमेरिका किसी देश की व्यापारिक नीतियों को अनुचित मानते हुए एकतरफा टैरिफ बढ़ा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह हैं या नहीं।अमेरिका ने जिन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है उनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, कंबोडिया, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्ज