चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की विदेश नीति अब निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली अब पूरी तरह अमेरिका और इस्राइल के पक्ष में खड़ी दिख रही है। चिदंबरम के अनुसार, भारत ने ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को पेश करने में मदद की, लेकिन अमेरिका और इस्राइल के उन हमलों पर एक शब्द नहीं कहा जिनमें 1300 ईरानी लोग मारे गए। उन्होंने बताया कि इन हमलों में 168 बच्चों की भी जान गई है। चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या यही सही कूटनीति और निष्पक्ष विदेश नीति है? उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं दिया, जबकि भारत ने अमेरिका और 12 अन्य देशों का साथ दिया।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 (2026) पास किया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव में ईरान के उन हमलों की कड़ी निंदा की गई है जो उसने अपने पड़ोसी देशों पर किए। अमेरिका ने कहा कि ईरान हर दिशा में हमले कर रहा है। भारत सहित करीब 140 देशों ने इस टेक्स्ट को समर्थन किया।प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हुए हमलों को गलत बताया गया। इसमें ईरान से मांग की गई कि वह रिहायशी इलाकों पर हमले तुरंत रोके। साथ ही, समुद्री व्यापार में दखल देना और उकसावे वाली कार्रवाई बंद करे। बहरीन ने इस अंतरराष्ट्रीय फैसले का स्वागत किया है।इन सबके बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने गुरुवार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बढ़ता तनाव और आम लोगों की मौत बहुत दुखद है। पीएम मोदी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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